कोरोना से लंबे समय तक बीमार रहने वालों में डिमेंशिया का खतरा: रिसर्च

Risk of Dementia In Corona : कोरोना महामारी से दुनिया को बचाने को लेकर लगातार रिसर्च जारी है. लेकिन लगातार इसके नए नए वैरिएंट्स के आने की वजह से कोई रिसर्च इसे रोकने में कारगर साबित नहीं हुई है. मतलब ऐसा कोई दावा किस भी देश के वैज्ञानिक ने नहीं किया कि इस दवा को लेने से कोरोना नहीं होगा, या फिर इसका इलाज आ गया है. लेकिन हां, समय समय पर इससे जुड़ी कई और बीमारियों को खतरा रोगियों को या इससे ठीक होने वालों में बढ़ जरूर गया है. दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अब एक नई स्टडी में सामने आया है कि लंबे समय तक कोरोना पीड़ित रहने के बाद जिन लोगों में एकाग्रता और याददाश्त (Concentration And Memory) में कमी की दिक्कतें होती हैं, उनमें डिमेंशिया (Dementia) का खतरा बढ़ जाता है. इस स्टडी में बताया गया है कि कोरोना वायरस के कारण डिमेंशिया को लेकर शुरुआती परिवर्तन समय से पहले भी हो सकते हैं.

इस रिसर्च को लीड करने वाले और अमेरिका के बैनर सन हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट (Banner Sun Health Research Institute) के डायरेक्टर अलीरेजा (Alireza) ने बताया कि डिमेंशिया ऐसी स्थिति है, जिसमें किसी व्यक्ति की याद रखने, सोचने या निर्णय लेने की क्षमता कम होने लगती है. इससे पीड़ित व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन में दिक्कतें आने लगती हैं.

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आमतौर पर डिमेंशिया 65 या इससे अधिक उम्र के लोगों को होता है. कोरोना इस बीमारी की प्रक्रिया को तेजी से बढ़ा सकता है. अध्ययन में कोविड से लोगों में स्वाद (Taste) और गंध (Smell) जाने के साथ ही एंग्जाइटी (Anxiety) और सोने की समस्या भी देखने को मिली है.

कोरोना के 50 से ज्यादा प्रभाव देखे गए हैं
यही कारण है कि साइंटिस्टों ने वैक्सीनेशन की जरूरत पर बल दिया है. जर्नल साइंटीफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना के पचास से ज्यादा प्रभाव देखे गए हैं.

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इनमें बालों का झड़ना, सांस में कमी, सिरदर्द, खांसी के साथ ही डिमेंशिया, डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी दिक्कतें भी पहचानी गई हैं. ये सभी कोरोना की चपेट में आने के अगले छह महीनों में देखी गईं. स्ट्रोक और डिमेंशिया जैसी न्यूरोलाजिकल डिसआर्डर काफी कम पाए गए थे, लेकिन इंटेसिव केयर (ICU) में भर्ती लोगों में 7 प्रतिशत को स्ट्रोक और लगभग 2 प्रतिशत को डिमेंशिया से ग्रस्त पाया गया.

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