ग्वालियर-जम्मू फ्लाइट आज रद्द, ट्रेनों में भी घटे पैसेंजर, क्या आतंकवाद का हो रहा असर?

ग्वालियर. कश्मीर में हो रही आतंकवादी घटनाओं का असर ग्वालियर के टूरिस्ट्स पर होता दिखाई दे रहा है. एक ओर ग्वालियर से जाने वाले ट्रेन के कई यात्रियों ने टिकट कैंसिल करा दी हैं, वहीं दूसरी ओर ग्वालियर-जम्मू के बीच फ्लाइट भी गुरुवार को रद्द कर दी गई. स्पाइसजेट फ्लाइट मैनेजमेंट का कहना है कि फ्लाइट को पैसेंजर्स की कमी की वजह से नहीं, ऑपरेशनल कारणों से रद्द किया गया है.

जानकारी के मुताबिक, बुधवार को इस फ्लाइट से 40 लोग ग्वालियर आए, जबकि 37 लोग जम्मू गए. जम्मू जाने वाली फ्लाइट की सीटें 50 फीसदी खाली रहीं. प्लेन की क्षमता 78 सीटर है, लेकिन उसे इस हिसाब से पैसेंजर नहीं मिले. गुरुवार को कोलकाता से आने वाली फ्लाइट जम्मू न जाकर ग्वालियर से ही लौट जाएगी. यह ग्वालियर से जम्मू के बीच रद्द की गई है.

ट्रेनों में घटी संख्या

दूसरी ओर, ट्रेन से जम्मू-कश्मीर सफर करने वालों की संख्या भी घट रही है. ग्वालियर से जम्मू जाने के लिए लोग मालवा एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस सहित वीकली ट्रेन पकड़ते हैं. बुधवार को जम्मू जाने वाली तीन ट्रेनों में ग्वालियर से महज 190 यात्रियों ने सफर किया, जबकि यहां से औसत रोज करीब 300 यात्री जम्मू-कश्मीर जाते हैं. कुछ दिनों पहले तक इन ट्रेनों में नो रूम वाली स्थिति थी, जबकि अब इनमें टिकट अवेलेबल हैं. 115 लोगों ने बुधवार को रिजर्वेशन काउंटर पर अगली यात्रा के टिकट कैंसिल कराए. इनमें बड़ी संख्या में जम्मू जाने वाले यात्री शामिल थे.

घाटी छोड़ने को मजबूर प्रवासी मजदूर

5 अक्‍टूबर के बाद से जम्मू और कश्‍मीर में 5 प्रवासियों की हत्‍या हो चुकी है. इसमें बिहार के 4 रेहड़ी मजदूर और उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम कारपेंटर भी शामिल हैं. इससे पहले स्‍थानीय सिख और हिंदू शिक्षक की हत्‍या कर दी गई थी. घाटी में लगातार हो रही प्रवासी मजूदरों की हत्‍या से अब डर का माहौल बना हुआ है. मजदूरों के डर को कम करने और सुरक्षा मुहैया कराने के लिए प्रशासन ने कश्‍मीर में प्रवासी मजदूरों के आवासी क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है. प्रशासन का कहना है कि प्रवासी मजदूर कश्‍मीर के अलग-अलग इलाकों में रहते हैं, जिसके कारण उनकी सुरक्षा करना थोड़ा मुश्किल होता जा रहा है. कई लोगों ने कहा कि दिहाड़ी मजदूरों को घाटी छोड़ने के लिए कहा जा रहा है.

प्रवासी मजदूरों के पलायन से चिंतित प्रशासन ने कुछ दिनों पहले घाटी के अलग-अलग जगहों पर रह रहे प्रवासी मजदूरों को सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में कैंप लगाकर रखा था. इनमें से कुछ मंगलवार तक घाटी छोड़ चुके थे या सुरक्षित स्थानों पर काम में लग गए थे. बारामूला की चूरा तहसील के एक दुकान-मालिक ने कहा, पुलिस कुछ दिनों से मजदूरों को जाने के लिए कह रही है, लेकिन कई लोग घाटी छोड़ने को तैयार नहीं थे. उनका कहना था कि उन्‍हें अभी तक अपनी मजदूरी के पैसे नहीं मिले हैं, इसलिए वह यहां से नहीं जाएंगे. रविवार की रात सौ से अधिक मजदूरों को यहां लाकर सरकारी स्कूल में रखा गया है. इनमें काफी लोग सोमवार शाम तक घाटी छोड़कर चले गए.

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