झारखंड: निजी प्रैक्टिस रोकने के लिए डॉक्टरों के पीछे लगाया जाए जासूस, प्रस्ताव पर बीजेपी सांसद को आया गुस्सा, फिर…

रांची. झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रांची स्थित रिम्स (RIMS) में कार्यरत डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाने के लिए खुफिया एजेंसी (Detective Agency) का सहारा लिए जाने का मामला शासी परिषद की बैठक में उठा. बैठक में शामिल बीजेपी सांसद संजय सेठ ने आपत्ति जताते हुए कहा इस प्रस्ताव को इस बैठक में लाना ही नहीं चाहिए था, क्योंकि डॉक्टर पढ़े-लिखे हैं और पढ़कर यहां पहुंचे हैं, सेवा दे रहे हैं. इस एजेंडे पर मेरा पूरा विरोध है.

बीच बैठक से निकलते हुए रांची सांसद ने कहा कि पूरे देश में कहीं भी ऐसा नहीं है कि डॉक्टरों के पीछे जासूस (डिटेक्टिव एजेंसी) लगाया गया हो. ये शोभा नहीं देती है. उन्होंने कहा कि मेरी निजी राय ये है कि इस विषय को जीबी के एजेंडे में लाना ही नहीं चाहिए था. उन्होंने कहा कि ऐसा तंत्र स्थापित करने की जरूरत है, जहां डॉक्टरों के अंदर एक भाव पैदा हो कि वो प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करें.

हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर सांसद ने कहा जितनी जरूरत है उतना ही इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना चाहिए. यह पैसे की बर्बादी ही है कि बड़े-बड़े भवन बना दिये गए हैं, पर वहां कोई काम नहीं हो रहा है.

संजय सेठ ने रिम्स की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यूरो सर्जरी विभाग की हालत काफी खराब है. यहां मरीजों का इलाज बरामदे में होता है. जबकि देश के अन्य अस्पतालों की ऐसी स्थिति नहीं है. उन्होंने रिम्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर जोर दिया. साथ ही मदर चाइल्ड यूनिट की स्थापना को भी जरूरी बताया.

मैन पावर की बहाली को लेकर सांसद संजय सेठ ने कहा कि पारा मेडिकल स्टाफ की संख्या बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि पारा मेडिकल स्टाफ ने रिम्स अस्पताल में हजारों लोगों की जान बचाने का काम किया है.

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