तालिबान ने तुर्की से मांगी ये मदद, इस ऑफर पर विचार कर रहे हैं एर्दोगन

अंकारा. तुर्की (Turkey) के राष्ट्रपति राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) ने कहा है कि उनकी सरकार ने काबुल में तालिबान के साथ अपनी पहली बैठक कर ली है. साथ ही उन्होंने बताया कि आतंकी समूह तालिबान (Taliban) ने उनके सामने काबुल एयरपोर्ट (Kabul Airport) को चलाने का ऑफर रखा है. जिसका आकलन अभी किया जा रहा है. संवाददाताओं से बात करते हुए राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने कहा, ‘हमने तालिबान के साथ अपनी पहली बातचीत कर ली है, जो करीब 3.5 घंटे तक चली. अगर जरूरत पड़ी तो, तो हमारे बीच इस तरह की बातचीत दोबारा करने का अवसर भी होगा.’

इससे एक दिन पहले तुर्की के दो अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था कि तालिबान ने उनकी सरकार से विदेशी सैनिकों की वापसी के बाद काबुल एयरपोर्ट के लिए तकीनीकी सहायता मांगी है लेकिन ये भी कहा है कि उन्हें (तुर्की) अगस्त की समयसीमा से पहले अपने सभी सैनिकों की वापसी करानी होगी. एक अधिकारी ने कहा कि तुर्की अब इस दुविधा में पड़ गया है कि वह तालिबान की मदद करे या नहीं.

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स से तुर्की के अधिकारियों ने इस ऑफर की पुष्टि की है. उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान के सशर्त अनुरोध पर निर्णय लेना अंकारा के लिए कठिन होगा. गौरतलब है कि मुस्लिम राष्ट्र तुर्की अफगानिस्तान में नाटो मिशन का हिस्सा था और अभी भी काबुल हवाई अड्डे पर उसके सैकड़ों सैनिक मौजूद हैं. तालिबान ने अमेरिकी और ब्रिटिश सैनिकों को 31 अगस्त तक काबुल एयरपोर्ट खाली करने का फरमान सुनाया है. इसके साथ ही तुर्की की सेना को भी काबुल छोड़ने को कहा है.

पहले तुर्की ने ही दिया था ऑफर
अफगानिस्तान में नाटो मिशन का हिस्सा कई मुस्लिम तुर्की भी रहे हैं. हालांकि महीनों पहले से ही राष्ट्रपति एर्दोआन ये कहते रहे हैं कि अनुरोध किए जाने पर वह एयरपोर्ट पर तुर्की की मौजूदगी जारी रख सकते हैं. अफगानिस्तान पर कब्जे से पहले भी तुर्की ने एयरपोर्ट पर तकनीकी और सुरक्षा सहायता की पेशकश की थी. इसे लेकर अधिकारी ने बताया, ‘तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट को चलाने के लिए तकनीकी सहयोग की गुहार लगाई है.’ पहचान ना बताने की शर्त पर उसने कहा, ‘तुर्की के सुरक्षाबलों की गैर मौजूदगी में इस कठिन काम को करने वाले कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है.’

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तुर्की क्यों चाहता है काबुल एयरपोर्ट?
काबुल एयरपोर्ट को मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए एक सुरक्षित रास्ता माना जाता है. कहा जा रहा है कि तुर्की इससे अपने दो उद्देश्य पूरे करना चाहता है. पहला उद्देश्य ये कि पश्चिमी देशों के साथ खराब चल रहे रिश्तों में सुधार लाया जा सके और दूसरा ये कि इस संकटग्रस्त देश में मानवीय सहायता पहुंचाने का रास्ता खुला रहे. क्योंकि अफगानिस्तान में पहले से ही खाने का संकट बना हुआ है. तालिबान के आने से कई देशों ने वित्तीय सहायता भी रोक दी है. ऐसे में यहां एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो सकता है. खाने की पहले से जारी समस्या और बढ़ सकती है. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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