बंगाल: किताब में दावा- बीजेपी को परेशान कर सकता है CM का चेहरा न होना

“द बंगाल कनन्ड्रमः द राइज ऑफ बीजेपी एंड फ्यूचर ऑफ टीएमसी” के मुताबिक बीजेपी, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए बिना चुनावी समर में उतरी थी और उसे सफलता भी मिली थी. फाइल फोटो

किताब के मुताबिक “भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली (Sourav Ganguly), राज्यसभा के सदस्य एवं पत्रकार स्वपन दासगुप्ता (Swapan Dasgupta) और यहां तक कि रामकृष्ण मिशन के साधु, स्वामी कृपाकरानंद का नाम भी मीडिया की खबरों में आ चुका है.”

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 31, 2021, 5:48 PM IST

नई दिल्ली. इस साल पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bengal Assembly Election 2021) में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब उसके पास मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा नहीं होना है. एक किताब में दावा किया गया है कि भगवा दल के पास ऐसा कोई नेता नहीं है, जिसकी लोकप्रियता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) जैसी हो. पत्रकार संबित पाल, अपनी किताब ” द बंगाल कनन्ड्रमः द राइज ऑफ बीजेपी एंड फ्यूचर ऑफ टीएमसी” में लिखते हैं कि बीजेपी, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए बिना चुनावी समर में उतरी थी और उसे सफलता भी मिली थी, क्या यह बंगाल में मुमकिन है?

पश्चिम बंगाल उथल पुथल के दौर से गुजर रहा है. प्रदेश में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से लेकर कोविड-19 महामारी के आर्थिक प्रभाव तक पर विवाद है. ऐसे समय में इस साल अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) और बीजेपी अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने और उनमें अमल करने में जुटे हुए हैं. पाल ने कहा, “2021 के विधानसभा चुनाव में बंगाल में बीजेपी की सबसे बड़ी परेशानी मुख्यमंत्री का चेहरा होगा. इसे लेकर पहले से ही अंदरूनी कलह चल रही है.” उन्होंने पुस्तक में लिखा, “भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली (Sourav Ganguly), राज्यसभा के सदस्य एवं पत्रकार स्वपन दासगुप्ता (Swapan Dasgupta) और यहां तक कि रामकृष्ण मिशन के साधु, स्वामी कृपाकरानंद का नाम भी मीडिया की खबरों में आ चुका है.”

त्रिपुरा और मेघालय के पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व प्रदेश बीजेपी प्रमुख तथागत रॉय ने भी खुले तौर पर मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने की इच्छा जताई है.” बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि पार्टी मुख्यमंत्री पद के लिए किसी उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं करेगी और विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री के चेहरे को सामने रखे बिना लड़ेगी. लेखक ने कहा, “बंगाल में बीजेपी के पास ऐसा कोई नेता नहीं है, जिसकी लोकप्रियता ममता बनर्जी जैसी हो. टीएमसी जानती है कि यह उसके लिए फायदेमंद है.”

“ब्लूम्सबरी इंडिया” की ओर से प्रकाशित किताब में पाल लिखते हैं, “बीजेपी, टीएमसी के भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज, भतीजा-राज (अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) को निशाना बनाने के लिए) मुस्लिम तुष्टिकरण और ममता (Mamata Banerjee) द्वारा एनआरसी सीएए का विरोध करने का मुद्दा उठाने की तैयारी में हैं, जबकि ममता बनर्जी अपनी लोहा लेने वाली छवि और बंगाली भावना पर निर्भर कर रही हैं.”

लोकसभा 2019 के चुनाव में बंगाल में बीजेपी की सीटें दो से बढ़कर 18 हो गई हैं और उसका मत प्रतिशत 17 फीसदी से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया है. यह इजाफा महज़ चार साल में हुआ है. टीएमसी के सांसदों और विधायकों समेत कई नेताओं ने हाल में बीजेपी का दामन थामा है.




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