महामारी में मनेगा ‘काला दिवस’, किसान बोले- 100 फीसदी है कृषि कानूनों का मॉर्टेलिटी रेट

सरकार और किसान पक्षों के बीच 11 दौर की बातचीत के बाद भी किसी ठोस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है.(किसान आंदोलन की फाइल फोटो: Shutterstock)

Farmers Protest: किसान मजदूर संघर्ष कमेटी (Kisan Mazdoor Sangrash Committee) के सरवन सिंह पांढेर ने कहा, ‘पहले हम एक बार में 15-20 हजार के काफिले में जाते थे, अब यह आंकड़ा एक बार में 4-5 हजार हो गया है.’

नई दिल्ली. तीन नए कृषि कानूनों (Three New Farm Laws) का विरोध कर रहे किसानों ने 26 मई को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का ऐलान किया है. इसके संबंध में पंजाब से बड़ी संख्या में किसानों का जत्था राजधानी दिल्ली की सीमाओं (Delhi Borders) की ओर रवाना हुआ है. केंद्र सरकार के तीन कानूनों का विरोध करते हुए किसानों को 6 महीने से ज्यादा समय बीत चुका है. सरकार और किसान पक्षों के बीच 11 दौर की बातचीत के बाद भी किसी ठोस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है. संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य और क्रांतिकारी किसान यूनियन के डॉक्टर दर्शन पाल सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, ‘हम गांव, शहरों और दिल्ली की सीमाओं पर विरोध करेंगे. हालांकि, यह शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि विरोध होगा. हम ऐसा काली पगड़ी, दुपट्टा या कपड़े पहनकर करेंगे…किसान अपनी छतों, ट्रैक्टरों पर काले झंडे लगाएंगे और हर गांव में और पंजाब में और दिल्ली की सीमाओं पर पक्के धरने पर मोदी सरकार का पुतला जलाएंगे.’ उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कोविड नियमों को ध्यान में रखकर किया जाएगा. कोविड के दौर में प्रदर्शन को लेकर क्या कहते हैं किसान सिंह ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार हमारी दुर्दशा को ना देखकर हमें खलनायक के रूप में दिखा रही है. उन्हें अपने पहले के प्रस्तावों को बेहतर करने की जरूरत है. किसान वास्तविक मांगों के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं.’ इसके अलावा किसान नेताओं ने प्रदर्शन और दिल्ली कूच के दौरान किसानों की कम संख्या होने का दावा किया है.यह भी पढ़ें: हिसार: किसान आंदोलन के दौरान किसान की मौत, विसरा जांच के लिए भिजवाया किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सरवन सिंह पांढेर ने कहा, ‘पहले हम एक बार में 15-20 हजार के काफिले में जाते थे, अब यह आंकड़ा एक बार में 4-5 हजार हो गया है.’ उन्होंने कहा, ‘हमारा धरना दिल्ली बॉर्डर पर महामारी के बीच शुरू हुआ था, हमारे धरने को 6 महीने पूरे होने जा रहे हैं और कोविड अभी भी यहीं है. देखने वाली बात यह है कि सरकार ने इन हालात को खत्म करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए हैं. हम वापिस नहीं जाने वाले.’ उन्होंने जानकारी दी कि किसान टीका लगवाने के लिए तैयार हैं.

कैप्टन अमरिंदर सिंह की बात मानने से इनकार रिपोर्ट के मुताबिक, जब किसानों से पूछा गया कि क्या वेल पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 27 मई से पटियाला में तीन दिवसीय धरना नहीं देने की बात मानेंगे या नहीं. इसपर बीकेयू के सुखदेव सिंह कोकरिकलां ने कहा, ‘नहीं, हम हमारी योजना जारी रखेंगे. कोविड की मृत्यु दर 5 से 10 प्रतिशत है, कृषि कानूनों की मृत्यु दर 100 फीसदी है.’ पुलिस भी लगातार किसानों से बड़ी संख्या में इकट्ठा नहीं होने की अपील कर रही है.





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