INDORE : लोकायुक्त की टीम पहुंचते ही नगर निगम के कई अफसर ऑफिस छोड़कर भागे

इंदौर. लोकायुक्त (Lokayukta) की टीम ने इंदौर नगर निगम के जानकारी विभाग के अधीक्षक और महिला क्लर्क को रिश्वत (Bribe) लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया. ये दोनों एक कंस्ट्रक्शन कम्पनी के संचालक से गार्डन बनाने का बिल पास करने के बदले ये रिश्वत वसूल रहे थे. लोकायुक्त की 10 दिन के भीतर ये दूसरी बड़ी कार्रवाई है.

इंदौर नगर निगम के जनकार्य विभाग में पदस्थ अधीक्षक विजय सक्सेना और महिला क्लर्क हेमालि वैध को लोकायुक्त ने उस वक़्त रंगेहाथों दबोच लिया,जब वह कन्स्ट्रक्शन कम्पनी के बिल पास करने के एवज में रिश्वत लेकर उसे अलमारी में रख रहे थे. इन पैसों की मांग अधीक्षक ने की थी, लेकिन  उसने महिला क्लर्क को भी अपने साथ शामिल कर लिया था. अधीक्षक सक्सेना ने पैसे लेकर महिला क्लर्क को थमा दिए और उसने यह पैसे अलमारी में रख दिए.

बिल पास करने के लिए वसूली
मूलतः उज्जैन के रहने वाले धीरेन्द्र चौबे की रूद्र कंस्ट्रक्शन कम्पनी है. कुछ समय पहले उन्होंने इंदौर के बीजासेन  मंदिर प्रांगण में पार्क के निर्माण का ठेका लिया था. ठेकेदार ने समय पर काम पूरा कर लिया और तय राशि के मुताबिक़ चौबे ने लगभग 9 लाख से अधिक का बिल नगरनिगम के जनकार्य विभाग में लगा दिया. लेकिन उसके बाद भी उनका बिल पास नहीं हुआ.
बिल पास करने के लिए रिश्वत
बिल पास कराने के लिए चौबे को विभाग में कई बार चक्कर लगाना पड़ा. अधीक्षक विजय सक्सेना ने बिल पास करने के बदले में तीन प्रतिशत कमीशन की मांग रिश्वत के तौर पर कर दी. इस पर चौबे ने इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सव्यसांची सर्राफ से कर दी. लोकायुक्त ने मामले के सत्यापन के लिए निगम अधिकारी से बातचीत की रिकार्डिंग करवाई. जब शिकायत की पुष्टि हुई तो लोकायुक्त के एक ट्रेप दल का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व करने के लिए डीएसपी प्रवीण बघेल को नियुक्त किया गया.

अलमारी में रखे पैसे
डीएसपी प्रवीण बघेल ने योजना बनाकर ठेकेदार को रवाना किया. इसी दौरान निगम अधिकारी सक्सेना ने रिश्वत लेने के लिए ठेकेदार को अपने दफ्तर में ही बुलवा लिया, और रिश्वत देने के लिए महिला क्लर्क की तरफ इशारा कर दिया. महिला क्लर्क हेमालि वैद्य ने 25 हजार रूपये बतौर रिश्वत लेकर अपनी विभागीय अलमारी में रख दिए. मौके पर खुफिया तौर पर मौजूद लोकायुक्त दल ने तत्काल महिला और विजय सक्सेना को हिरासत में लेकर रिश्वत के पैसे जब्त कर लिए. पुलिस दोनों आरोपियों को लेकर एमजी रोड थाने पहुंच गई. लोकायुक्त ने की विभिन्न गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

कई अफसर गायब
जिस वक़्त लोकायुक्त ने जनकार्य विभाग के इन अधिकारियों को रंगेहाथों गिरफ्तार किया, उस वक़्त विभिन्न विभागों के और भी कई कर्मचारी अधिकारी रिश्वत लेने की योजना बना रहे थे. कुछ पीड़ित पैसे लेकर वहा पहुंचे भी थे, लेकिन निगम परिसर में लोकायुक्त की दस्तक के बाद अचानक कई अफसर अपनी केबिन छोड़कर वहां से चले गये. कई ने अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिए. उन्हें डर था कि लोकायुक्त कहीं उन्हें भी रंगे हाथों न दबोच ले.

पहले भी हुईं शिकायत
विजय सक्सेना कुछ समय पहले ही जनकार्य विभाग में पदस्थ हुआ है. इससे पहले वह नक्शा विभाग में रह चुका है. पहले भी उसकी कई शिकायतें हो चुकी हैं. वह नक़्शे पास करने के एवज में भी रिश्वत की मांग करता था.

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