Jharkhand school: पत्रकार व शिक्षक की कोशिशों के नतीजे- रेल के डिब्बे जैसे बनाए क्लासरूम

जमशेदपुर. झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के एक गांव में बच्चों को स्कूल में आकर्षित करने के लिए कक्षाओं को ट्रेन के डिब्बे जैसा रूप दिया गया है और फर्श पर ‘सांप सीढ़ी’ के खेल का बोर्ड चित्रित किया गया है. शिक्षण के नवाचार तरीके अपनाएं गए हैं. पूर्व पत्रकार व शिक्षक अरविंद तिवारी की कोशिशों के नतीजे भी दिखें हैं और पोटका ब्लॉक के तंग्रैन गांव के उन्नत मिडल स्कूल में विद्यालय छोड़ने की दर अब शून्य है.

स्कूल के कार्याहक प्रधानाचार्य तिवारी ने कहा, “कोविड-19 की पाबंदियों के बाद स्कूल 24 सितंबर को खोले गए थे जिसके बाद से 35 नए विद्यार्थियों का विद्यालय में दाखिला किया गया है. ”

उन्होंने स्कूल में बच्चों का दाखिल करने और उन्हें पढ़ाई को संजीदगी से लेने के लिए नए-नए विचार लागू किए हैं. वह 2017 में सरकारी स्कूल में नियुक्त हुए थे. लॉकडाउन के दौरान उन्होंने पांच कमरों वाली एक मंजिला स्कूल इमारत के तीन कमरों को रेल के डिब्बों का रूप दिया. दूर से देखने पर स्कूल की इमारत एक यात्री ट्रेन की तरह दिखती है. चित्रकार ऋषव मल्हार के प्रयासों की सराहना करते हुए, तिवारी ने कहा कि इस बदलाव ने विद्यार्थियों को आकर्षित किया है और वे इमारत के साथ फोटो खिंचवाने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं.

तिवारी ने कहा कि उन्होंने स्कूलों में इन बदलावों के लिए खुद पैसा खर्च किया है. झारखंड-ओडिशा सीमा के पास स्थित तंग्रैन के स्कूल में पड़ोसी जोनोडीह, खिदिरसाई और सिलिंग गांवों से भी छात्र आने लगे हैं. तिवारी ने बताया कि नए प्रवेश के बाद स्कूल में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की संख्या 269 हो गई है. तिवारी की कोशिशों को देखते हुए ग्रामीणों ने स्कूल के विकास के लिए करीब 12 कट्ठा (भूमि नापने की इकाई) जमीन दान दी है. (भाषा के इनपुट के साथ)

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