MP : 20 IAS अफसरों के तबादले के बाद प्रशासनिक गलियारों में बेचैनी, अब अगली बारी किसकी?

भोपाल. मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए प्रशासनिक तबादलों (IAS Officers transfer) के बाद अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है. सरकार ने जिन आईएएस अफसरों 20 अफसरों की अदला बदली की है उसमें वह अफसर भी शामिल हैं जिनके कारण सरकार को किसी न किसी मुद्दे पर किरकिरी का सामना करना पड़ा.

राज्य सरकार ने वित्त और ऊर्जा विभाग में तैनात बड़े अफसरों को बदल दिया है इसके पीछे एक बड़ी वजह वित्त के प्रबंधन में सरकार की विफलता और अचानक खड़े हुए बिजली संकट को माना जा रहा है. सरकार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए राजस्व जुटाने की जिम्मेदारी वित्त विभाग में कई आईएएस अफसरों को दी गई थी. लेकिन वित्तीय प्रबंधन कमजोर होने की वजह से विभाग के दो अफसरों को बदल दिया गया है.

ये अफसर इधर से उधर
सरकार ने 1996 बैच के आईएएस अधिकारी अमित राठौर को वित्त विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटाकर आईटी विभाग का प्रमुख सचिव बना दिया. इसी तरह 1997 बैच के अधिकारी गुलशन बामरा को हटाकर योजना और आर्थिक सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई. बिजली प्रबंधन संभालने में नाकाम रहे अफसरों को भी इधर से उधर किया गया है. सरकार ने 2000 बैच के आईएएस अफसर विवेक कुमार पोरवाल को एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी का एमडी बनाया है. सरकार ने 2010 बैच के आईएएस अधिकारी दीपक सक्सेना को ऊर्जा विकास निगम से हटाकर अटल बिहारी वाजपई सुशासन संस्थान की जिम्मेदारी दी है.

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कांग्रेस का आरोप
आईएएस अफसरों को बदलने पर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहा अफसरों को बदलने से प्रबंधन नहीं सुधरेगा और सरकार के बदलने का समय आ गया है. उसी के बाद व्यवस्थाएं पटरी पर आ सकेंगी.

अपनों को मलाई, किरकिरी कराने वालों को लूप लाइन
सरकार व्यवस्था सुधारने में लगी है. यही कारण है कि बेहतर नतीजे देने वाले आईएएस अफसरों को अब बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है. जबकि सरकार की किरकिरी कराने वाले अफसरों को लूप लाइन वाले विभाग दिए जा रहे हैं. हालांकि बीजेपी का कहना है प्रशासनिक फेरबदल एक सामान्य प्रक्रिया है. जिसकी जहां जरूरत होगी उसकी वहां नियुक्ति की जाएगी.

अब किसकी बारी
दो दिन पहले जिस तरह देर रात 20 आईएएस अफसरों के तबादले किए गए उससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप के हालात हैं. अभी आला स्तर के अफसरों के साथ ही मैदानी स्तर पर तैनात कलेक्टरों को भी बदला जाना है. ऐसे में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जो कलेक्टर जिलों में बेहतर परफॉर्मेंस नहीं दे सके हैं उनको हटाया जाएगा और नए चेहरों को जिलों की कमान सौंपी जाएगी.

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