Success Story: मां की बीमारी के इलाज के लिए गेहूं की नई किस्म उपजाई, अब विदेशों से मिल रहे आर्डर

एथोसाइनिन के कारण काला गेहूं सुगर फ्री होता है.

Success Story: काले गेहूं (Black Wheat) में औषधीय गुण होते हैं. मप्र के ललित परमार (Lalit Parmar) ने काले गेहूं की खेती का प्रयोग कर मोटा मुनाफा कमाया है.

नई दिल्ली. मध्यप्रदेश के शुजालपुर जिले के कालापीपल गांव में खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा है. ऐसे में मैनेजमेंट स्टूडेंट रहे 32 साल के ललित परमार ने कुछ अलग करने की ठानी. खूब अध्ययन किया और प्रयोग. फिर एक प्रयोग से उनकी किस्मत ऐसी चमकी वे करोड़पति हो गए.
ललित बताते हैं कि उनकी मां डायबिटिक हैं. वे मां के लिए पोष्टिक अनाज की तलाश कर रहे थे. इसी बीच उन्हें किसी ने बताया कि काला गेहूं इसमें बहुत फायदा करेगा क्योंकि यह शुगर फ्री गेहूं होता है. उनकी रिसर्च उन्हें पंजाब के रिसर्च सेंटर नेशनल एग्री फूड बायो टेक्नॉलजी मोहाली तक ले गई. यहां से ललित ने काले गेहूं की खेती करने का तरीका सीखा.
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दोस्तों को गेहूं पसंद आए तो देश भर में आर्डर की सप्लाई शुरू की
काले गेहूं की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि ललित ने इस बार 10 एकड़ में फसल लगाई. उन्होंने भोपाल के अपने मित्रों को भी यह गेहूं दिए. दोस्तों को गेहूं पसंद आए और उन्होंने देश भर में इसकी मार्केटिंग की. वे मंडी की बजाए सीधे ऑर्डर की सप्लाई करते हैं. जिन खेतों से वह मामूली आमदनी कमा पाते थे, अब उन्हीं खेतों से मोटी आमदनी होने लगी है.
एथोसाइनिन के कारण सुगर फ्री होता है गेहूं
काले गेहूं में एंथोसाइनिन की मात्रा आम गेहूं की तुलना में 149 पास प्रति मिलियन तक अधिक पाई जाती है. एंथ्रोसाइनिन एक नेचुरल एंटी ऑक्सीडेंट व एंटीबायोटिक है, जो हार्ट अटैक ,कैंसर, शुगर, मानसिक तनाव, घुटनों का दर्द, एनीमिया जैसे रोगों में काफी कारगर सिद्ध होता है. एथोसाइनिन के कारण यह सुगर फ्री भी होता है. स्टार्च भी कम होता है. ऐसे में शुगर के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है. इसमें जिंक की मात्रा भी अधिक होती है. इसे खाने से पाचन क्षमता भी तेजी से बढ़ती है. इसमें फैट की मात्रा भी कम होती है, जिससे मोटापा भी नहीं बढ़ता है. काले गेहूं रंग व स्वाद में सामान्य गेहूं से थोड़ा अलग होते हैं, लेकिन बेहद पौष्टिक होते हैं.
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यू ट्यूब से भी मिली मदद
यू ट्यूब पर शुलाजपुर के एक अन्य किसान के बारें में पता चला, जो कि काले गेहूं का उत्पादन कर रहा था. ललित ने इसका बीज 200 रुपए प्रति किलो में खरीदा. पहली बार में नुकसान हुआ लेकिन बाद में उन्हें प्रति एकड़ 15 से 20 गुना उपज मिलने लगी. उनके मुताबिक बाजार में 7 से 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक यह गेहूं बिकता है. अब उनके फसल तैयार है और उन्हें राजस्थान, यूपी, कर्नाटक और उत्तराखंड से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं.

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