UP Panchayat Elections: 1995 के बाद से इटावा के 168 पंचायतों में नहीं अपनाई गई आरक्षण की प्रकिया– News18 Hindi

इटावा. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के इटावा (Etawah) जिले में 168 ऐसी ग्राम पंचायतें (Gram Panchayats) हैं, जिनमें साल 1995 से आरक्षण की प्रकिया (Reservation Policy) नहीं अपनाई गई हैं. इस कारण इन पंचायतों में पिछले 25 सालों से  अनुसूचित जाति के प्रधान का निर्वाचन नहीं हुआ है. अब इसकी शिकायत काग्रेंस पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह यादव ने पंचायत विभाग से की है. उन्होंने कहा कि सिर्फ इतना ही नहीं एक जिला पंचायत सदस्य, एक ब्लॉक प्रमुख और 250 के आसपास बीडीसी सदस्यों का निर्वाचन आरक्षण की सही प्रकिया के तहत आज तक सम्पन्न नहीं हो सका.

इटावा जिले की 168 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां वर्ष 1995 के बाद से आज तक एक बार भी अनुसूचित जाति का ग्राम प्रधान निर्वाचित नहीं हो सका है. आरक्षण का चक्र इधर-उधर घूमता रहा, लेकिन इन पंचायतों तक नहीं पहुंच सका. इसी तरह से कुछ सीटें जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत की भी हैैं जो आरक्षित नहीं हुईं। कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष उदयभान सिंह यादव ने इस संबंध में पंचायत राज विभाग के निदेशक को पत्र लिखा है. उन्होंने अभी तक अनुसूचित जाति के आरक्षण से वंचित ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, ब्लाॅक प्रमुख पद पर आरक्षण करने की मांग की है.

इन पंचायतों में नहीं लागू हुई आरक्षण प्रक्रिया 

बता दें उत्तर प्रदेश में पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत 1995 से पंचायत चुनावों में आरक्षण लागू हुआ था. जिसमें 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए तथा 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 22 प्रतिशत अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया. जिले में कुल 471 ग्राम सभाओं में से 168 ऐसी ग्राम सभाएं हैं, जहां 1995 से अब तक अनुसूचित जाति का एक भी प्रधान नहीं है. ब्लॉक बढ़पुरा की 61 में से 18 ग्राम पंचायत, ब्लॉक चकरनगर की 41 में से 4 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक सैफई की 45 में से 26, ब्लॉक ताखा की 42 में से 15 ग्राम पंचायत, ब्लॉक बसरेहर की 67 में से 27 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक जसवंतनगर की 61 में से 24 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक भरथना की 63 में से 24 ग्राम पंचायतें, ब्लॉक महेवा की 91 में से 30 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां अनुसूचित जाति का प्रधान नहीं बना.

तत्कालीन सरकारों पर लगाया आरोप 

पूर्व अध्यक्ष उदयभान सिंह ने पंचायत चुनाव आरक्षण से वंचित अनुसूचित जाति को न्याय दिलाने की मांग की है. जिससे पंचायत राज अधिनियम का जो उद्देश्य था उसका अनुपालन हो सके. यादव का आरोप है कि आरक्षण की यह प्रकिया तत्कालिन सरकारों के प्रभाव में लागू नहीं की गई. परिणाम स्वरूप इस तरह की अनियमितताएं आम हो गई. काग्रेंस नेता की शिकायत पर इटावा के मुख्य विकास अधिकारी राजागणपति आर ने कहा कि आरक्षण की प्रकिया ऑनलाइन अपनाई जा रही है. किसी भी आपित्त का निस्तारण हर हाल में किया जायेगा.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *