WTC final: न्यूजीलैंड को विदेशी खिलाड़ी ने संभाला, पहले 3 टेस्ट में तीन 50+ का स्कोर बनाया

डेवाॅन कॉनवे ने 54 रन की पारी खेली AP)

डेवाॅन काॅनवे (Devon Convey) ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल (WTC Final) में 54 रन की पारी खेली. इस तरह से वे टूर्नामेंट में अर्धशतकीय पारी खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने. फाइनल में न्यूजीलैंड की टीम ने शुरुआती बढ़त हासिल कर ली है.

साउथैम्पटन. डेवॉन कॉनवे ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में शानदार आगाज किया है. उनका यह टूर्नामेंट का पहला ही मैच था. उन्होंने 54 रन बनाए. न्यूजीलैंड ने पहली पारी में दो विकेट पर 101 रन बना लिए हैं. टीम इंडिया ने पहली पारी में 217 रन बनाए थे. इस तरह से न्यूजीलैंड की टीम सिर्फ 116 रन पीछे है और उसके 8 विकेट बचे हुए हैं. मैच के पहले दिन बारिश के कारण टॉस तक नहीं हो सका था. ऐसे में यह मैच रिजर्व डे के दिन भी खेला जाएगा.

डेवॉन कॉनवे का यह करियर का तीसरा ही टेस्ट है. उन्होंने इंग्लैंड सीरीज में टेस्ट डेब्यू किया था. इस मैच से पहले डेवॉन कॉनवे ने 2 मैच की 4 पारियों में 77 की औसत से 306 रन बनाए थे. एक दोहरा शतक और अर्धशतक लगाया. उन्होंने पहले टेस्ट में दोहरा शतक और दूसरे टेस्ट में 80 रन बनाए थे. अब तीसरे टेस्ट में 54 रन की पारी खेली. यानी वे हर टेस्ट में 50 से अधिक रन की पारी खेल रहे हैं.

लिमिटेड ओवर फॉर्मेट में भी प्रदर्शन अच्छा

मूलत: दक्षिण अफ्रीका के रहने वाले डेवॉन कॉनवे को लिमिटेड ओवर में अच्छा प्रदर्शन करने के कारण टेस्ट में मौका मिला. 29 साल के इस बल्लेबाज को तीन वनडे में मौका मिला है. उन्होंने एक शतक और एक अर्धशतक लगाया है. 75 की औसत से 225 रन बनाए हैं. इसके अलावा 14 टी20 में 4 अर्धशतक जड़े हैं. 59 की औसत से 473 रन बनाए हैं. इससे उनके इंटरनेशनल करियर के शानदार प्रदर्शन को समझा जा सकता है. अपने देश में मौका नहीं मिला

डेवॉन कॉनवे मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के हैं और 2009 में उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया था. कुछ साल दक्षिण अफ्रीका में खेलने के बाद वो 2017 में न्यूजीलैंड आ गए थे. 29 साल के इस खिलाड़ी ने न्यूजीलैंड में करियर बनाने के लिए सितंबर 2017 में जोहानिसबर्ग छोड़ दिया था. डेविड कॉनवे ने साउथ अफ्रीका में दूसरे लेवल का घरेलू क्रिकेट खेला था, लेकिन उन्हें वहां ज्यादा मौके नहीं मिले. दक्षिण अफ्रीका में प्रांतीय क्रिकेट कॉनवे अवसरों की कमी से निराश थे. वहां उन्हें वनडे, टी20 और फर्स्ट क्लास में अलग-अलग नंबरों पर बल्लेबाजी करने का मौका मिला, जिससे उनके प्रदर्शन में स्थिरता नहीं आ पाई.





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