WTC Final: रवींद्र जडेजा और अश्विन के बीच उलझ गई टीम इंडिया और गंवा दी सबसे बड़ी ट्रॉफी

नई दिल्ली. भारतीय टीम न्यूजीलैंड से आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनिशप का फाइनल (IND vs NZ WTC Final) जिस अंदाज में हारी, वह प्रशंसकों को बरसों सालती रहेगी. कहते हैं हार के हजार बहाने. लेकिन अगर आप डब्ल्यूटीसी फाइनल (WTC Final) पर बारीक रख रहे थे तो मानेंगे कि भारत ने टॉस से पहले ही ऐसी बड़ी गलती कर दी थी, जो उसे अंत तक परेशान करती रही. यह गलती थी रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) और रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) दोनों को एक साथ प्लेइंग इलेवन में रखना. वैसे तो टीम मैनेजमेंट ने इसे गलती नहीं माना और इसके बचाव में टीम संतुलन का हवाला दिया. लेकिन संजय मांजरेकर जैसे कई पूर्व क्रिकेटरों ने मैच शुरू होने से पहले ही कह दिया था कि इस साउथैम्प्टन की पिच पर भारत को दो स्पिनर के साथ उतरने की जरूरत नहीं है.

भारत और न्यूजीलैंड के बीच डब्ल्यूटीसी फाइनल 18 से 23 जून के बीच इंग्लैंड के साउथैम्प्टन में खेला गया. मैच से कई दिन पहले से ही साउथैम्प्टन में जोरों की बारिश हो रही थी. यह भी तय था कि मैच वाले दिन भी बारिश होती रहेगी. भारत ने मैच से एक दिन पहले अपनी प्लेइंग इलेवन घोषित की. इसमें तकरीबन वही सारे नाम थे, जो एक महीने पहले से कयास लगाए जा रहे थे. एक बैलेंस टीम. टीम मैनेजमेंट ने भी कहा कि यह ऐसी बैलेंस टीम है जो दुनिया के किसी भी हिस्से में बेस्ट है. भारतीय मैनेजमेंट यहीं गलती कर गया था. उसने जो टीम चुनी थी, वह कागज पर तो परफेक्ट थी, लेकिन मौसम और पिच के लिहाज से नहीं.

मौसम विभाग की ओर से कहा गया था कि मैच में अधिकतर समय बादल छाए रहेंगे. ऐसे में प्लेइंग इलेवन चुनते वक्त दो बातें साफ थीं. पहली, मैच में तेज गेंदबाजों का दबदबा रहेगा. खासकर स्विंग गेंदबाजों का. दूसरी, मैच में बड़ा स्कोर बनने की संभावना ना के बराबर थी. ऐसे में बल्लेबाजी पर भी फोकस करना जरूरी था. भारत ने दूसरी बात का ध्यान तो पूरा रखा, लेकिन पहली बात नजरअंदाज कर गया. मैच में साफ दिखा कि भारत को मैच में चौथे तेज गेंदबाज की कमी बुरी तरह खली.

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क्या भारत अश्विन या जडेजा को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखकर एक और तेज गेंदबाज चुन सकता था. इसका जवाब आसान नहीं है. दरअसल, भारतीय टीम अगर जडेजा या अश्विन को प्लेइंग इलेवन से बाहर करती तो उनके विकल्प के तौर पर उमेश यादव या मोहम्मद सिराज को शामिल किया जा सकता था. लेकिन टीम में चौथे तेज गेंदबाज को शामिल करने से ज्यादा कठिन फैसला अश्विन और जडेजा में से किसी को एक को चुनना था.

दरअसल, अश्विन पिछले कुछ समय से बेहतरीन फॉर्म में हैं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अच्छी बल्लेबाजी भी की थी. दूसरी ओर, रवींद्र जडेजा इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में से एक हैं और हर फॉर्मेट में फिट हैं. वे गेंदबाजी में भले ही ज्यादा असरदार नहीं हैं, लेकिन इसकी भरपाई अपनी बल्लेबाजी और फील्डिंग से करते हैं. टीम प्रबंधन इन दोनों क्रिकेटरों में से किसी एक को चुनने में ही उलझ गई. ऐसे में शायद संतुलन का तर्क दिया गया होगा. लेकिन क्रिकेट जानने वालों के लिए यह समझना मुश्किल नहीं कि जिस माहौल और पिच में डब्ल्यूटीसी फाइनल खेला गया, उसमें दो स्पिनरों के साथ उतरना बड़ी गलती थी.

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